भूमिका कल्पना कीजिए, आपने कल रात बहुत सोच-समझकर, अपनी एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की। आपने एक बेहतरीन कैप्शन लिखा, कुछ अच्छे हैशटैग्स लगाए और फोन को साइड में रख दिया। पांच मिनट बाद, आप पहला काम करते हैं—फोन उठाना और नोटिफिकेशन चेक करना। "सिर्फ 3 लाइक्स?" आपके दिल में एक अजीब सी बेचैनी होने लगती है। आप हर दो मिनट में फोन अनलॉक करते हैं, स्क्रीन को रीफ्रेश करते हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है और लाइक्स की संख्या नहीं बढ़ती, आपके अंदर एक अजीब सा खालीपन और उदासी छाने लगती है। आप सोचने लगते हैं, "क्या मैं इस फोटो में अच्छी नहीं लग रही?", "क्या लोगों को मैं पसंद नहीं हूँ?", "क्या मुझसे कोई गलती हो गई?" यह स्थिति सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। ऑफिस में बॉस का एक छोटा सा "Good Job" न कहना, पार्टनर का आपकी नई ड्रेस पर ध्यान न देना, या दोस्तों के ग्रुप में आपकी बात पर किसी का प्रतिक्रिया न देना—ये सब हमें अंदर तक हिला कर रख देते हैं। हमारा मूड, हमारा पूरा दिन और यहाँ तक कि हमारा खुद के बारे में नज़रिया भी इस बात पर निर्भर ...
1. Introduction: राहुल की कहानी (शायद यह आपकी भी कहानी है) महीने की 1 तारीख। दोपहर के ठीक 12 बजे राहुल के मोबाइल की स्क्रीन चमकती है। एक नोटिफिकेशन आता है— "Your account has been credited with INR 65,000." यह मैसेज देखते ही राहुल के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ जाती है। पिछले बीस दिनों से रुकी हुई उसकी सारी इच्छाएं अचानक जाग उठती हैं। वह तुरंत अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट से एक शानदार डिनर ऑर्डर करता है। ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट में हफ्तों से पड़े उस ब्रांडेड जूते को 'Buy Now' कर देता है। वीकेंड पर दोस्तों के साथ आउटिंग का प्लान बनता है, जहाँ बिल का एक बड़ा हिस्सा राहुल खुशी-खुशी चुकाता है। उसे लगता है, "अभी तो महीना शुरू हुआ है, बहुत पैसे हैं!" लेकिन, कहानी में ट्विस्ट आता है 10 तारीख को। जब राहुल अपना बैंक बैलेंस चेक करता है, तो उसके होश उड़ जाते हैं। अकाउंट में सिर्फ 12,000 रुपये बचे हैं। अभी मकान का किराया, बिजली का बिल और दूध वाले के पैसे देना बाकी है। राहुल के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आती हैं। वह खुद से सवाल करता है, "आखिर इतने सारे पैसे इतनी जल्द...